SONGFABLE · 2011

Wicked Games

THE WEEKND · 2011 · TORONTO, CANADA

TL;DR: यह टूटे दिल का साधारण गाना नहीं है, बल्कि एक ऐसे आदमी की स्वीकारोक्ति है जो जानता है कि वह जो प्यार माँग रहा है वह नकली है, और फिर भी उसे खरीदने को तैयार है। "Wicked Games" में असली दर्द बेवफाई का नहीं, बल्कि अकेलेपन का है जो सच से ज़्यादा झूठ को तरजीह देता है।
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एक सच जो पहली बार में चौंकाता है

ज़्यादातर लोग "Wicked Games" को एक सेक्सी, धीमा, रात के तीन बजे वाला गाना समझकर सुनते हैं। धुन फिसलन भरी है, आवाज़ रेशम जैसी है, गिटार की एक उदास लूप पूरे ट्रैक पर छाई रहती है। लेकिन अगर आप शब्दों के पीछे जाएँ, तो जो मिलता है वह रोमांस नहीं है। यह एक आदमी है जो सामने वाली को साफ़-साफ़ बता रहा है कि वह जानता है कि यह सब अभिनय है, और फिर भी वह चाहता है कि अभिनय जारी रहे। वह प्यार नहीं माँग रहा, वह प्यार का प्रदर्शन माँग रहा है, क्योंकि उस रात असली चीज़ उसके बस में नहीं है।

यही इस गाने की सबसे चुभने वाली बात है। यह अपने ही किरदार को हीरो नहीं बनाता। गायक खुद को सही ठहराने की कोशिश नहीं करता, न ही वह किसी और को दोष देता है। वह बस यह मान लेता है कि वह खोखला हो चुका है और खोखलेपन को भरने के लिए वह किसी और के समय, शरीर और झूठे शब्दों का सहारा ले रहा है। लोकप्रिय संगीत में ऐसा ईमानदार आत्म-निंदा वाला स्वर 2011 में बहुत कम सुनाई देता था, और शायद यही वजह है कि यह गाना पंद्रह साल बाद भी उतना ही असहज करता है जितना पहले दिन करता था।

एक और मज़ेदार बात: बहुत से श्रोता आज भी इसे Chris Isaak के 1989 वाले "Wicked Game" से गड्डमड्ड कर देते हैं। दोनों का नाम लगभग एक जैसा है, दोनों में गिटार की एक तड़पती हुई लाइन है, दोनों खतरनाक आकर्षण के बारे में हैं। पर Isaak का गाना रेगिस्तान की तपिश जैसा है, और The Weeknd का गाना बंद कमरे की ठंडी रोशनी जैसा। एक में डर है कि प्यार हो जाएगा; दूसरे में डर है कि अब प्यार होना ही बंद हो चुका है।

टोरंटो का वह लड़का जिसका चेहरा किसी ने नहीं देखा था

2010 के आख़िरी महीनों में YouTube पर तीन गाने चुपचाप अपलोड हुए। न कलाकार का चेहरा, न नाम की कोई जानकारी, न कोई प्रेस रिलीज़। सिर्फ़ एक अजीब सा उपनाम: The Weeknd. महीनों तक इंटरनेट पर बहस चलती रही कि यह कोई एक गायक है, कोई बैंड है, या किसी बड़े स्टार का छुपा हुआ प्रोजेक्ट है। रहस्य ही उस समय का सबसे बड़ा मार्केटिंग हथियार बन गया, हालाँकि यह जानबूझकर बनाई गई रणनीति थी या शर्मीलेपन का नतीजा, इस पर आज भी मतभेद हैं।

पर्दे के पीछे वह लड़का था Abel Tesfaye, जन्म 1990 में टोरंटो में, इथियोपियाई प्रवासी माता-पिता के घर। बताया जाता है कि उसकी परवरिश में दादी की बड़ी भूमिका रही और घर में अम्हारिक बोली जाती थी। स्कारबोरो के उस इलाके में पला-बढ़ा जो टोरंटो की चमकदार डाउनटाउन तस्वीर में कभी नहीं दिखता, जहाँ अफ्रीकी, कैरेबियाई और दक्षिण एशियाई प्रवासी परिवारों की भीड़ बसती है। किशोरावस्था में उसने स्कूल छोड़ दिया और घर से निकल गया। कहा जाता है कि उपनाम "The Weeknd" उसी हफ़्ते की याद से आया जब वह बिना बताए घर छोड़कर चला गया था, और "e" इसलिए हटाया गया क्योंकि उसी नाम का एक बैंड पहले से मौजूद था।

House of Balloons नाम का वह मुफ़्त मिक्सटेप 2011 के मार्च में इंटरनेट पर आया, जिसमें "Wicked Games" शामिल था। इसे बड़े हिस्से में दो प्रोड्यूसरों ने आकार दिया, Doc McKinney और Illangelo, और आवाज़ की जो बनावट उन्होंने गढ़ी वह उस समय के R&B से बिल्कुल अलग थी। बास गहरा और धुंधला, ड्रम दूर से आते हुए, गिटार और सिंथ पर इतना रीवर्ब कि लगे जैसे कोई खाली अपार्टमेंट सुबह चार बजे साँस ले रहा हो। यह मिक्सटेप बिना किसी रिकॉर्ड लेबल के, बिना किसी कीमत के रिलीज़ हुआ, और कुछ ही हफ़्तों में संगीत पत्रकारिता की सबसे बड़ी चर्चा बन गया। उसी दौर में टोरंटो के ही Drake ने अपने ब्लॉग के ज़रिए इस अनजान गायक की ओर ध्यान खींचा, जिससे यह लहर और तेज़ हुई।

भारतीय श्रोताओं के लिए इस कहानी में एक बहुत जानी-पहचानी बात है। यह उसी दशक की शुरुआत थी जब भारत में भी संगीत का दरवाज़ा फ़िल्म इंडस्ट्री से हटकर इंटरनेट की तरफ़ खिसकना शुरू हुआ। मुंबई के चालों से निकली हिप-हॉप, YouTube पर अपलोड हुए घर के रिकॉर्ड किए गए ट्रैक, बिना लेबल के बने इंडी एल्बम, यह सब उसी विचार पर टिका था जिस पर The Weeknd का पहला मिक्सटेप टिका था: अगर संगीत में दम है तो उसे किसी दरबान की मंज़ूरी नहीं चाहिए। "Wicked Games" उस बदलाव का एक तरह का दस्तावेज़ है, वह पल जब एक बिना चेहरे वाला लड़का सीधे दुनिया के हेडफ़ोन में घुस गया।

बाद में यह गाना 2012 के Trilogy संकलन के ज़रिए आधिकारिक रूप से रिलीज़ हुआ, चार्ट पर चढ़ा, और अमेरिका में कई बार प्लैटिनम प्रमाणित हुआ। बताया जाता है कि इसे बेस्ट R&B परफ़ॉर्मेंस श्रेणी में ग्रैमी नामांकन भी मिला। जो गाना मुफ़्त में बाँटा गया था, वह इंडस्ट्री के सबसे बड़े मंच तक पहुँच गया।

गाने के भीतर असल में क्या चल रहा है

"Wicked Games" की बनावट बहुत सीधी है और यही उसकी ताकत है। शुरुआत में एक बेचैन, थोड़ी विकृत गिटार की लाइन आती है, जो पूरे गाने में लगभग बदलती नहीं। उसके ऊपर आवाज़ आती है, ऊँची और पतली, लगभग काँपती हुई। शुरुआती पंक्तियों में गायक अपनी हालत बयान करता है: वह किसी चीज़ से भाग रहा है, कुछ खो चुका है, और अंधेरे में किसी अजनबी को अपने पास बुला रहा है।

फिर गाना धीरे-धीरे एक बहुत असहज सौदे में बदल जाता है। वह सामने वाली से कहता है कि वह उसे वह सब दे, जो असली रिश्ते में मुफ़्त मिलता है, पर यहाँ उसकी कीमत चुकाई जा रही है। वह झूठ माँगता है, अभिनय माँगता है, दिखावटी अपनापन माँगता है। और सबसे तीखी बात यह कि वह इस बात को छुपाता नहीं। वह पूरी तरह जानता है कि जो शब्द उसे सुनाई देंगे उनका कोई वज़न नहीं होगा। उसे परवाह भी नहीं, क्योंकि उस रात उसे सच नहीं चाहिए, उसे बस थोड़ी देर के लिए यह भ्रम चाहिए कि वह अकेला नहीं है।

यह गाना नशे की छाया में भी चलता है, हालाँकि वह छाया सीधी नहीं दिखाई जाती। पूरे House of Balloons मिक्सटेप की दुनिया एक ऐसी पार्टी की दुनिया है जो कभी ख़त्म नहीं होती और इसीलिए भयानक हो जाती है। "Wicked Games" उस पार्टी के आख़िरी घंटे का गाना है, जब मेहमान जा चुके हैं, संगीत अभी बज रहा है, और कमरे में बची हुई दो अजनबी आत्माएँ एक-दूसरे को अस्थायी दवा की तरह इस्तेमाल कर रही हैं।

गाने का शीर्षक ही दोहरे अर्थ में काम करता है। "खेल" यहाँ फ़्लर्ट का चंचल खेल नहीं है, बल्कि वह चालाकी है जो दोनों तरफ़ चल रही है, और "wicked" में शरारत से ज़्यादा आत्म-विनाश की बू है। और अंत में गाना कोई हल नहीं देता, कोई सबक नहीं देता, कोई माफ़ी नहीं माँगता। आवाज़ बस ऊँची होती जाती है, लगभग गिड़गिड़ाहट तक, और फिर गिटार वहीं छोड़कर चला जाता है जहाँ से शुरू हुआ था। चक्र पूरा होता है, कुछ नहीं बदलता।

संस्कृति पर असर और वह जो पीछे छूट गया

2011 से पहले मुख्यधारा का R&B आमतौर पर आत्मविश्वास बेचता था। गायक या तो जीत रहा होता था या दिल टूटने के बाद उठ खड़ा होता था। The Weeknd ने इस समीकरण को उलट दिया। उसने ऐसा किरदार पेश किया जो जीत भी चुका है और खाली भी है, जिसके पास सब कुछ उपलब्ध है और इसीलिए कुछ भी कीमती नहीं रहा। इसे बाद में आलोचकों ने "alternative R&B" या "PBR&B" जैसे नामों से पुकारा, और अगले दशक में यह स्वर इतना आम हो गया कि आज याद रखना मुश्किल है कि कभी यह कितना अजीब लगता था।

संगीत के स्तर पर भी असर गहरा था। "Wicked Games" ने साबित किया कि R&B को चमकदार, साफ़ और उछालभरा होने की ज़रूरत नहीं। इंडी रॉक और ड्रीम पॉप जैसी धुंधली, रीवर्ब से भीगी बनावट को अपनाकर उसने एक ऐसा साउंड बनाया जो सुनने में सुंदर और महसूस करने में डरावना है। House of Balloons पर इंडी रॉक के नमूनों का खुला इस्तेमाल भी उसी दिशा का इशारा था, यह ऐलान कि शैलियों की दीवारें अब सजावट भर हैं।

भारतीय संदर्भ में इस गाने का विषय बिल्कुल अजनबी नहीं है। हिंदी सिनेमा के पास खरीदे हुए अपनेपन और असली तड़प के टकराव पर एक पूरी परंपरा रही है, तवायफ़ के कोठे की उन कहानियों से लेकर जहाँ गाने में मुस्कान बिकती है और आँखों में सच्चाई रह जाती है। "Umrao Jaan" या "Pyaasa" जैसी फ़िल्मों ने यही सवाल पूछा था कि जब स्नेह का लेन-देन पैसे से तय हो, तो भावना का क्या होता है। "Wicked Games" उसी सवाल को इक्कीसवीं सदी के उत्तरी अमेरिकी शहर में, ग्राहक के नज़रिए से, और बिना किसी सहानुभूति के दोबारा पूछता है। फ़र्क सिर्फ़ इतना है कि यहाँ शिकायत करने वाला कोई नहीं, क्योंकि गाने वाला खुद ही जानता है कि वह क्या कर रहा है।

गाने का असर उसके अपने करियर पर भी साफ़ दिखता है। आगे चलकर The Weeknd स्टेडियम भरने वाला, सुपर बाउल के मंच पर खड़ा होने वाला वैश्विक सुपरस्टार बन गया, उसकी धुनें ज़्यादा चमकीली और अस्सी के दशक की तरफ़ झुकी हुई हो गईं। लेकिन उसकी पहचान का बीज इसी अँधेरे कमरे में पड़ा था, और आज भी उसके लाइव शो में जब यह गाना आता है, भीड़ का शोर बाकी सब गानों से अलग होता है, जैसे लोग किसी पुराने राज़ में साथ शामिल हो रहे हों।

आज भी यह गाना क्यों चुभता है

क्योंकि जिस भावनात्मक स्थिति का यह वर्णन करता है, वह अब पहले से ज़्यादा आम हो गई है। ऐप पर एक स्वाइप से मिल जाने वाली नज़दीकी, आधी रात के मैसेज, वह गर्माहट जिसका कोई कल नहीं होता। "Wicked Games" उस युग से आया है जब यह सब अभी नया-नया था, और यह उस दुनिया की कीमत को बहुत पहले पहचान गया था। यह उपदेश नहीं देता, बस दिखाता है कि जब अपनापन आसानी से उपलब्ध हो जाए, तो अकेलापन ख़त्म नहीं होता, वह सिर्फ़ अपना रूप बदल लेता है।

दूसरी वजह इसकी आवाज़ है। Abel की गायकी में एक अजीब विरोधाभास है, तकनीक बेहद परिष्कृत, लेकिन भाव लगभग बचकाना, जैसे कोई बच्चा अँधेरे से डर रहा हो और उसे मानने को तैयार न हो। यही टकराव गाने को बचाता है। अगर वह ठंडा और शातिर लगता, तो यह सिर्फ़ एक बुरे आदमी का गाना होता। पर वह टूटा हुआ लगता है, और इसीलिए श्रोता उससे नफ़रत करने के बजाय उसमें अपनी सबसे कमज़ोर रात देख लेता है।

और तीसरी वजह शायद सबसे सरल है। यह गाना ईमानदार है। इसमें कोई नैतिक सफ़ाई नहीं, कोई सुखद अंत नहीं, कोई वादा नहीं कि सुबह सब ठीक हो जाएगा। पॉप संगीत में इतनी बेरहम ईमानदारी दुर्लभ है, और जो चीज़ दुर्लभ हो वह पुरानी नहीं पड़ती। सालों बाद भी, जब वह गिटार लूप शुरू होता है, कमरे का तापमान थोड़ा गिर जाता है।


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