SONGFABLE · 1967

Comme d'habitude

CLAUDE FRANÇOIS · 1967 · PARIS, FRANCE

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Comme d'habitude - Claude François (1967)

TL;DR: एक टूटे हुए रिश्ते की थकी हुई दिनचर्या पर लिखा गया फ्रेंच गीत, जो दो साल बाद अंग्रेज़ी में "My Way" बनकर पूरी दुनिया का सबसे प्रसिद्ध आत्मगौरव-गान बन गया। एक ही धुन, दो विपरीत आत्माएँ — हार और विजय।

हुक — एक धुन, दो ज़िंदगियाँ

संगीत के इतिहास में शायद ही कोई ऐसा क्षण होगा जब एक ही धुन ने दो बिल्कुल विपरीत भावनाओं को इतनी पूर्णता से व्यक्त किया हो। 1967 में पेरिस के एक स्टूडियो में जब क्लोद फ्रांस्वा (Claude François) ने माइक्रोफ़ोन के सामने खड़े होकर "Comme d'habitude" गाया, तो वह दरअसल अपनी टूटी हुई शादी की राख से एक गीत बुन रहे थे। दो साल बाद वही धुन, वही नोट्स, वही पियानो की चढ़ती-उतरती लहरें — अटलांटिक के पार पहुँचकर फ़्रैंक सिनात्रा (Frank Sinatra) की आवाज़ में "My Way" बन गईं, और अचानक यह गीत हार का नहीं, बल्कि एक ज़िंदगी जी लेने के गर्व का ऐलान बन गया।

यह बदलाव सिर्फ़ अनुवाद का मामला नहीं था। यह संस्कृति, पुरुषत्व, और बीसवीं सदी के उत्तरार्ध में पश्चिमी आत्म-छवि के बदलते स्वरूप की कहानी है। और इस कहानी का बीज एक टूटे दिल वाले फ्रेंच पॉप-स्टार के अकेलेपन में दबा हुआ है।

पृष्ठभूमि — क्लो-क्लो और फ्रांस का येह-येह युग

क्लोद फ्रांस्वा को फ्रांस में प्यार से "क्लो-क्लो" (Cloclo) कहा जाता था। 1939 में मिस्र के इस्माइलिया में जन्मे, स्वेज़ संकट के बाद अपने परिवार के साथ फ्रांस लौटे, और 1960 के दशक में फ्रेंच पॉप के सबसे बड़े सितारों में से एक बन गए। उनका दौर "येह-येह" (yé-yé) कहलाता था — एक संगीतमय आंदोलन जिसमें अमेरिकी और ब्रिटिश रॉक एंड रोल को फ्रेंच भाषा और संवेदनशीलता में ढाला गया था। सिल्वी वार्तां (Sylvie Vartan), फ्रांस्वाज़ हार्डी (Françoise Hardy), जॉनी हॉलिडे (Johnny Hallyday) — ये सब उसी पीढ़ी के थे।

क्लो-क्लो की पहचान सिर्फ़ उनकी आवाज़ नहीं थी। वह एक पूरा तमाशा थे — चमकीले सूट, सटीक कोरियोग्राफ़ी, और "क्लोडेट्स" (Clodettes) नामक नर्तकियों का दल। वह फ्रेंच मनोरंजन उद्योग के पहले "टोटल पैकेज" कलाकारों में से थे, एक तरह से अपने समय के माइकल जैक्सन।

लेकिन 1967 के आते-आते क्लो-क्लो की निजी ज़िंदगी में दरार आ चुकी थी। उनका रिश्ता गायिका फ्रांस गाल (France Gall) के साथ खत्म हो रहा था — वही फ्रांस गाल जिन्होंने 1965 में सर्ज गेन्सबूर (Serge Gainsbourg) के लिखे "Poupée de cire, poupée de son" से यूरोविज़न जीता था। अफ़वाहें थीं कि गाल ने क्लो-क्लो को छोड़ दिया था। इस टूटन ने उन्हें झकझोर दिया।

इसी मानसिक स्थिति में संगीतकार जैक्स र्वो (Jacques Revaux) उनके पास एक धुन लेकर आए, जो पहले कई गायकों ने ठुकरा दी थी — यहाँ तक कि हर्व विलार (Hervé Vilard) और पेटुला क्लार्क (Petula Clark) ने भी। क्लो-क्लो ने धुन सुनी, उसमें कुछ बदलाव सुझाए, और गीतकार जिल थिबो (Gilles Thibaut) के साथ मिलकर उसमें अपनी टूटी हुई शादी की दिनचर्या भर दी।

असली अर्थ — रोज़मर्रा की मृत्यु

"Comme d'habitude" का शाब्दिक अनुवाद है "हमेशा की तरह।" और यही दो शब्द पूरे गीत की आत्मा हैं। यह कोई भव्य त्रासदी नहीं है, कोई नाटकीय विदाई नहीं है। यह उन रिश्तों की कहानी है जो एक भी विस्फोट के बिना, धीरे-धीरे, हर सुबह के एक ही नाश्ते की तरह, हर रात की एक ही करवट की तरह — मर जाते हैं।

गीत में एक पुरुष है जो सुबह उठता है, अपनी सोई हुई साथी को देखता है जो उसकी ओर पीठ करके लेटी है, उसकी चादर ठीक करता है ताकि उसे ठंड न लगे, और फिर अकेले बाहर निकल जाता है। दिन भर वह काम करता है, मुस्कुराता है, ज़िंदगी का अभिनय करता है। शाम को घर लौटता है। साथी अभी भी वहाँ है, लेकिन सच में नहीं है। वे बिस्तर पर लेटते हैं, एक-दूसरे को छूते भी हैं — लेकिन वह स्पर्श भी बस "हमेशा की तरह" है, एक खाली अनुष्ठान।

यह गीत प्रेम के अंत के बारे में नहीं है। यह उस अंत के बाद की चुप्पी के बारे में है — जब दो लोग एक ही छत के नीचे रहते हुए भी एक-दूसरे के लिए अदृश्य हो चुके हैं, और फिर भी ज़िंदगी का तमाशा "हमेशा की तरह" चलता रहता है। इसमें न आँसू हैं, न चीख। बस एक थकी हुई स्वीकृति।

संगीत की दृष्टि से देखें तो धुन इसी भावना को सहारा देती है। पियानो धीमी गति से शुरू होता है, लगभग एक थके हुए कदम की तरह। फिर ऑर्केस्ट्रा परत-दर-परत चढ़ता है, मानो भावनाओं का ज्वार आ रहा हो — लेकिन वह ज्वार कभी फटता नहीं। वह बस उठता है, उठता रहता है, और फिर वहीं स्थिर रह जाता है। यही गीत का असली कौशल है — विस्फोट का वादा करना, और फिर उसे रोक लेना।

"My Way" में रूपांतरण — एक हार कैसे विजय बनी

1968 में एक युवा अमेरिकी गायक-गीतकार पेरिस में थे। उन्होंने टेलीविज़न पर क्लोद फ्रांस्वा को यह गीत गाते देखा, और उसकी धुन उनके दिमाग में बस गई। उनका नाम था पॉल अंका (Paul Anka)। वह न्यूयॉर्क लौटे, धुन के अधिकार खरीदे, और एक बिल्कुल नए अंग्रेज़ी गीत के लिए कलम उठा ली।

लेकिन अंका ने जो लिखा, वह क्लो-क्लो की मूल भावना से बिल्कुल विपरीत था। उन्होंने फ़्रैंक सिनात्रा को मन में रखकर लिखा — उस सिनात्रा को जो उस वक्त 50 की उम्र पार कर चुके थे, संन्यास की बातें कर रहे थे, और अपने जीवन का लेखा-जोखा कर रहे थे। अंका ने एक ऐसे आदमी की कहानी लिखी जो जीवन के अंत में खड़ा होकर पीछे मुड़कर देखता है, स्वीकार करता है कि उसने गलतियाँ कीं, चोटें खाईं, लेकिन अंततः उसने सब कुछ अपने तरीक़े से किया।

एक ही धुन पर बैठी दो आत्माएँ — एक थकी हुई फुसफुसाहट, दूसरी गर्वीली घोषणा। फ्रेंच मूल में पुरुष हार चुका है। अंग्रेज़ी संस्करण में पुरुष विजेता है। फ्रेंच में वह अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का गुलाम है। अंग्रेज़ी में वह अपनी ज़िंदगी का बादशाह है।

यह बदलाव संयोग नहीं था। यह 1960 के दशक के अंत की अमेरिकी संस्कृति का चरित्र था — आत्म-निर्माण, व्यक्तिवाद, और "मैंने अपने दम पर यह किया" की कथा। सिनात्रा का "My Way" तब से अनगिनत अंत्येष्टियों में बजा है, अनगिनत सेवानिवृत्ति भाषणों में उद्धृत हुआ है। वह अमेरिकी पुरुषत्व का अंतिम भजन बन गया।

लेकिन क्लो-क्लो ने खुद कभी "My Way" को सहज स्वीकार नहीं किया। उन्हें लगता था कि अंका ने उनके दर्द को छीनकर उसे अमेरिकी शान-शौकत में बदल दिया। और एक दुखद विडंबना यह है कि 1978 में, सिर्फ़ 39 साल की उम्र में, अपने पेरिस अपार्टमेंट में स्नान करते समय एक खराब लाइट बल्ब बदलते हुए बिजली के झटके से क्लो-क्लो की मृत्यु हो गई। उनका असली गीत — हार का गीत — दुनिया भूल गई। दुनिया को सिर्फ़ विजय का गीत याद रहा।

हिन्दी पाठकों के लिए सांस्कृतिक संदर्भ

भारतीय संगीत प्रेमियों के लिए "Comme d'habitude" की कहानी कई परिचित तंतुओं को छूती है।

सबसे पहले, यह आर.डी. बर्मन (R.D. Burman) के युग की याद दिलाती है — जब हिंदी फ़िल्म संगीत पश्चिमी धुनों को बेझिझक भारतीय आत्मा में ढाल रहा था। पंचम-दा ने "चुरा लिया है तुमने जो दिल को" से लेकर "मेहबूबा मेहबूबा" तक कई गीतों में पश्चिमी प्रभावों को सोख लिया, लेकिन उन्हें कभी कॉपी नहीं किया — उन्हें रूपांतरित किया। ठीक वैसे ही जैसे पॉल अंका ने एक फ्रेंच धुन को अमेरिकी कथा में ढाला।

दूसरा सूत्र है 1968 में बीटल्स की ऋषिकेश यात्रा। उसी समय जब क्लो-क्लो पेरिस में अपना दर्द गा रहे थे, जॉन लेनन और पॉल मैकार्टनी (Paul McCartney) महर्षि महेश योगी के आश्रम में ध्यान कर रहे थे, और उसी अवधि में "व्हाइट एल्बम" का अधिकांश हिस्सा लिख रहे थे। यह उल्लेखनीय है कि कैसे एक ही ऐतिहासिक क्षण में पश्चिमी संगीतकार दो अलग-अलग रास्तों पर थे — एक रोज़मर्रा के अकेलेपन में डूबा हुआ, दूसरा आध्यात्मिक मुक्ति की तलाश में।

तीसरा संदर्भ है ए.आर. रहमान (A.R. Rahman) का काम। रहमान का "दिल से रे" या "तेरे बिना" जैसे गीतों में जो ऑर्केस्ट्रल बिल्ड-अप है — धीमी शुरुआत से धीरे-धीरे भावनात्मक चरम तक — वह उसी यूरोपीय शान्सॉन परंपरा का विस्तार है जिसमें "Comme d'habitude" बैठता है। फ्रेंच शान्सॉन में गीत-कथन (storytelling) और संगीत समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, और यही दर्शन भारतीय फ़िल्म संगीत के सर्वश्रेष्ठ क्षणों में दिखाई देता है।

अंत में, "हमेशा की तरह" की भावना भारतीय साहित्य और सिनेमा में बार-बार आती है। साहिर लुधियानवी की कविता में, गुलज़ार के गीतों में, सत्यजित रे की फ़िल्मों में — उन शादियों की चुप्पी जो ज़िंदा तो हैं लेकिन सांस नहीं ले रहीं। "आँधी" की आरती देवी और जे.के., "इजाज़त" के सुधा-महेंद्र — इन सब में वही थकी हुई स्वीकृति है जो क्लो-क्लो की आवाज़ में थी।

आज यह क्यों गूँजता है

लगभग साठ साल बाद भी "Comme d'habitude" प्रासंगिक क्यों है? क्योंकि इक्कीसवीं सदी के डिजिटल युग में रिश्तों की वही "हमेशा की तरह" मृत्यु और भी सूक्ष्म रूप में हो रही है। अब लोग एक ही बिस्तर पर लेटे हुए अलग-अलग स्क्रीन में डूबे रहते हैं। अब "हमेशा की तरह" का मतलब है हर सुबह एक ही इंस्टाग्राम स्क्रॉल, हर शाम एक ही नेटफ्लिक्स सीरीज़, हर रात बिना बात किए सो जाना।

गीत की एक और परत आज और चमकती है — performative living का विचार, यानी ज़िंदगी को जीने के बजाय "जीते हुए दिखाने" का दबाव। क्लो-क्लो का पात्र दिन भर मुस्कुराता है, अभिनय करता है, "हमेशा की तरह" बाहरी दुनिया को संतुष्ट करता है। यह सोशल मीडिया युग की पूर्व-छाया है, जहाँ हर कोई अपनी ज़िंदगी का एक संपादित संस्करण प्रस्तुत करता है, और असली खालीपन अंदर ही अंदर बढ़ता रहता है।

और शायद सबसे महत्वपूर्ण — गीत हमें याद दिलाता है कि एक ही कहानी को दो बिल्कुल विपरीत तरीक़ों से सुनाया जा सकता है। "Comme d'habitude" और "My Way" एक ही धुन हैं, लेकिन एक हार है और दूसरा विजय। यह संगीत की नहीं, बल्कि कथा की शक्ति है — कि हम अपनी ज़िंदगी को कैसे फ्रेम करते हैं, यह तय करता है कि वह त्रासदी है या महाकाव्य।

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  1. अगर "Comme d'habitude" और "My Way" एक ही धुन पर बिल्कुल विपरीत भावनाएँ व्यक्त कर सकते हैं, तो क्या यह संगीत की सीमा है या भाषा की शक्ति?
  2. भारतीय फ़िल्म संगीत में "हमेशा की तरह" मरते रिश्ते की भावना को सबसे बेहतर तरीक़े से किस गीत ने पकड़ा है?
  3. क्या आज के सोशल मीडिया युग में हम सब अपनी ज़िंदगी का "performative" संस्करण नहीं जी रहे — और क्या क्लो-क्लो का यह गीत उसी का पूर्वाभास था?
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