SONGFABLE · 2013

Royals

LORDE · 2013

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Royals - Lorde (2013)

TL;DR: "Royals" असल में पॉप संगीत में फैली हुई दौलत और शोहबाजी की दुनिया के खिलाफ एक नर्म-सी बगावत है — एक सोलह साल की न्यूज़ीलैंड की लड़की जो कहती है कि उसकी ज़िंदगी हीरे-जवाहरात और शैम्पेन वाली नहीं है, और वह इसमें बिल्कुल भी शर्मिंदा नहीं।

जब एक टीनएजर ने पूरी पॉप इंडस्ट्री का आईना दिखा दिया

ज़रा सोचिए। 2013 का साल है। रेडियो पर जो भी गाना बज रहा है, उसमें या तो किसी की महंगी गाड़ी की बात है, या क्रिस्टल शैम्पेन की, या हीरे जड़ी घड़ियों और निजी जेट की। पॉप संगीत मानो एक अंतहीन पार्टी बन चुका था जहाँ हर कोई दिखा रहा था कि उसके पास कितना पैसा है। और फिर अचानक, इसी शोर के बीच, एक धीमी, ठंडी, लगभग फुसफुसाती हुई आवाज़ आती है — एक लड़की की आवाज़ जो कहती है कि ये सारी चमक-दमक उसकी दुनिया का हिस्सा है ही नहीं, और सच कहूँ तो उसे इसकी परवाह भी नहीं।

यही "Royals" का जादू है। यह कोई गुस्से से भरा विद्रोही गीत नहीं है जो चीख-चीखकर अमीरों को कोसता हो। बल्कि यह एक शांत, आत्मविश्वास से भरी हुई घोषणा है — कि साधारण होना भी ठीक है, और शायद उसमें ही एक अलग तरह की शान है। सबसे चौंकाने वाली बात? यह गाना खुद एक वैश्विक सुपरहिट बन गया, दुनिया भर के चार्ट्स पर नंबर वन पहुँचा, और इसे लिखने वाली लड़की महज़ सोलह साल की थी। यानी जिस इंडस्ट्री की वह आलोचना कर रही थी, उसी ने उसे सिर-आँखों पर बैठा लिया।

न्यूज़ीलैंड के एक उपनगर से निकली एला

इस गाने के पीछे की कहानी उतनी ही असाधारण है जितनी खुद गाना। Lorde का असली नाम ella Marija Lani Yelich-O'Connor है, और उनका जन्म न्यूज़ीलैंड के ऑकलैंड शहर के पास एक उपनगर में हुआ था। उनकी माँ एक मशहूर कवयित्री थीं, और शायद यही वजह है कि एला बचपन से ही शब्दों के साथ खेलना जानती थीं। कहा जाता है कि उन्होंने बहुत कम उम्र में ही खूब पढ़ना शुरू कर दिया था, और किताबों से उनका रिश्ता उनके गीतों में साफ़ झलकता है।

"Lorde" नाम उन्होंने इसलिए चुना क्योंकि उन्हें राजा-महाराजाओं और कुलीन वर्ग का माहौल हमेशा से दिलचस्प लगता था — और मज़े की बात यह कि "Royals" गाना भी इसी विषय के इर्द-गिर्द घूमता है, बस उलटे नज़रिए से। नाम को थोड़ा स्त्रीलिंग बनाने के लिए उन्होंने उसमें "e" जोड़ दिया।

बताया जाता है कि "Royals" को लिखने और रिकॉर्ड करने में सिर्फ़ कुछ घंटे लगे। एला और उनके संगीत-साथी Joel Little ने इसे एक छोटे-से स्टूडियो में, स्कूल की छुट्टियों के दौरान तैयार किया। गाने की प्रेरणा कथित तौर पर एक पुरानी तस्वीर से आई थी जिसमें अमेरिकी बेसबॉल खिलाड़ी George Brett की जर्सी पर "Royals" शब्द लिखा था (यह कैनसस सिटी की टीम का नाम है)। उस शब्द ने एला के दिमाग में कुछ कौंधा दिया।

यहाँ भारतीय श्रोताओं के लिए एक दिलचस्प कड़ी है। हमारे यहाँ भी संगीत और सिनेमा अक्सर एक चमकीली, भव्य दुनिया दिखाते रहे हैं — बड़े बंगले, लग्ज़री कारें, शानदार शादियाँ। और इसी के समानांतर हमारे यहाँ एक मज़बूत परंपरा भी रही है जो साधारण ज़िंदगी, मध्यवर्गीय संघर्ष और ज़मीनी सच्चाई को आवाज़ देती है — चाहे वह पुराने हिंदी फ़िल्मी गीत हों या आज का इंडी संगीत। "Royals" उसी भावना से बात करता है जो हर उस नौजवान को समझ आती है जिसने कभी रेडियो पर बजती चकाचौंध भरी दुनिया को देखकर सोचा हो, "यह तो मेरी कहानी नहीं है।" यह वही एहसास है जो किसी छोटे शहर के लड़के या लड़की को महानगर की चमक देखकर होता है — एक हल्की-सी दूरी, और साथ ही अपनी जड़ों पर एक चुपचाप गर्व।

गाने के भीतर छिपा असली संदेश

अब ज़रा गाने के मतलब को खोलते हैं — और याद रहे, मैं यहाँ शब्दों को दोहराऊँगा नहीं, बल्कि उनके पीछे का भाव बताऊँगा।

गाने की शुरुआत में Lorde अपनी असल ज़िंदगी की एक तस्वीर खींचती हैं। वह कहती हैं कि उन्होंने कभी अपनी आँखों से वह शानो-शौकत नहीं देखी जिसका ज़िक्र हर दूसरे गाने में होता है। उनके आसपास का माहौल साधारण है, उनका शहर छोटा है, और उनकी ज़िंदगी में वो सब नहीं है जो टेलीविज़न और रेडियो दिखाते हैं। लेकिन इस स्वीकारोक्ति में कोई शिकायत नहीं, कोई हीन भावना नहीं। बल्कि एक तरह की साफ़गोई है।

फिर वह पॉप संस्कृति के उन तमाम प्रतीकों की लंबी फ़ेहरिस्त की ओर इशारा करती हैं — महँगी शराबें, सोने के गहने, आलीशान होटल के कमरे, बेहिसाब दौलत के नज़ारे। वह कहती हैं कि ये सारी चीज़ें उनके सपनों में भी नहीं आतीं, क्योंकि ये उनकी असलियत से इतनी दूर हैं कि इनसे जुड़ना ही नामुमकिन लगता है। यह गाने का सबसे तीखा मगर सबसे सूक्ष्म तंज़ है — कि पूरी एक पीढ़ी ऐसे सपने बेचे जा रहे हैं जो उनकी पहुँच से कोसों दूर हैं।

लेकिन गाने का सबसे ताकतवर हिस्सा वह है जहाँ वह अपनी और अपने दोस्तों की एक अलग दुनिया का ऐलान करती हैं। वह कहती हैं कि उन्हें इस झूठी रॉयल्टी (राजसी ठाठ-बाट) की ज़रूरत नहीं — क्योंकि उनके अपने भीतर एक अलग किस्म का राज है, एक अलग तरह का अधिकार। यहाँ "Royals" शब्द पलट जाता है। यह अब अमीरों का प्रतीक नहीं रहता, बल्कि उन साधारण नौजवानों का बन जाता है जो अपनी शर्तों पर अपनी ज़िंदगी की मालकियत चाहते हैं। वह एक तरह की कल्पनाशील रानी बनकर अपनी छोटी-सी, सच्ची दुनिया पर राज करना चाहती हैं — दिखावे की दुनिया पर नहीं।

संगीत भी इस भाव को बखूबी ढोता है। बीट बहुत न्यूनतम है — एक उँगलियों की चुटकी की आवाज़, एक भारी मगर खाली-सा बास, और उसके ऊपर परतों में सजी हुई आवाज़ें। यह जानबूझकर खाली रखा गया साउंड ही गाने को इतना अलग बनाता है। जहाँ बाकी पॉप गाने हर सेकंड में आपको आवाज़ों से भर देते थे, वहाँ "Royals" में जगह है, साँस लेने की गुंजाइश है। यह खालीपन भी एक संदेश है — कि कम में भी सुंदरता है।

एक गाने ने पॉप का व्याकरण बदल दिया

"Royals" सिर्फ़ एक हिट गाना नहीं था; यह एक मोड़ था। जब यह 2013 में रिलीज़ हुआ और दुनिया भर में छा गया, तब लोगों को एहसास हुआ कि श्रोता असल में कुछ अलग सुनना चाहते थे। उन्हें हर वक़्त की चकाचौंध से थकान हो चुकी थी, और एक ईमानदार, धीमी, सोची-समझी आवाज़ की प्यास थी।

इस गाने ने ग्रैमी पुरस्कारों में भी अपनी जगह बनाई — Lorde ने "Song of the Year" समेत बड़े सम्मान जीते, और वह इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि पाने वालों में शामिल हो गईं। कहा जाता है कि उनकी इस कामयाबी ने रिकॉर्ड कंपनियों को नए सिरे से सोचने पर मजबूर किया — कि एक एकल कलाकार, अपने अनोखे अंदाज़ के साथ, बिना किसी फ़ॉर्मूले के, दुनिया जीत सकता है।

"Royals" के बाद पॉप संगीत में एक नई लहर आई। धीमे, माहौल बनाने वाले, भावनात्मक गहराई वाले गाने ज़्यादा बनने और बिकने लगे। कई आलोचकों का मानना है कि Lorde ने उस रास्ते को चौड़ा किया जिस पर बाद में Billie Eilish जैसी कलाकार चलीं — एक ऐसी पीढ़ी जिसने फुसफुसाहट को भी ताकत बना दिया, और जिसने दिखावे की जगह आत्मीयता को चुना।

एक छोटी-सी बहस भी इस गाने से जुड़ी रही। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि गाने में जिन दौलत के प्रतीकों का मज़ाक उड़ाया गया, उनमें से कुछ का संबंध किसी ख़ास समुदाय के संगीत से जोड़ा जा सकता है। लेकिन ज़्यादातर श्रोताओं और समीक्षकों ने गाने की मूल भावना को साफ़ समझा — यह किसी समुदाय पर नहीं, बल्कि उस पूरी उपभोक्तावादी संस्कृति पर तंज़ था जो हर किसी को बेतहाशा खर्च और दिखावे की दौड़ में धकेलती है।

आज भी यह गाना दिल को क्यों छूता है

एक दशक से ज़्यादा बीत जाने के बाद भी "Royals" उतना ही प्रासंगिक है — शायद पहले से भी ज़्यादा। आज हम सोशल मीडिया के उस दौर में जी रहे हैं जहाँ हर कोई अपनी सबसे चमकीली, सबसे महँगी, सबसे "परफ़ेक्ट" तस्वीर दिखाने में लगा है। इंस्टाग्राम और दूसरे प्लेटफ़ॉर्म एक ऐसी दौड़ बन गए हैं जहाँ लोग वो ज़िंदगी दिखाते हैं जो शायद उनकी है ही नहीं। ऐसे में "Royals" का संदेश और भी गहरा हो जाता है — कि अपनी असलियत के साथ खड़े रहना, साधारण होने में शर्म न करना, और दिखावे की दौड़ से बाहर निकलना ही असली आज़ादी है।

भारत के संदर्भ में यह बात और भी मानीखेज़ है। हमारे यहाँ बढ़ता हुआ उपभोक्तावाद, ब्रांड्स का दबाव, और "स्टेटस" दिखाने की होड़ नौजवानों पर भारी पड़ रही है। हर त्योहार, हर शादी, हर फ़ंक्शन एक तरह की प्रतियोगिता बन गई है — कौन कितना खर्च कर सकता है। ऐसे माहौल में एक गाना जो कहता है "मुझे यह सब नहीं चाहिए, और मैं फिर भी पूरा हूँ" — वह एक राहत की तरह महसूस होता है।

"Royals" इसलिए टिका रहा क्योंकि वह किसी एक दौर की बात नहीं करता। वह उस सार्वभौमिक एहसास को छूता है जो हर पीढ़ी के नौजवान को होता है — कि दुनिया मुझसे कुछ बनने की उम्मीद कर रही है, मुझ पर कुछ खरीदने का दबाव डाल रही है, लेकिन मैं अपनी शर्तों पर जीना चाहता हूँ। और जब एक सोलह साल की लड़की इतने ठहराव और आत्मविश्वास से यह बात कहती है, तो उसका असर बरसों बाद भी कम नहीं होता।

शायद यही "Royals" की सबसे बड़ी जीत है — कि एक ऐसा गाना जो दौलत की दुनिया को ठुकराता है, वह खुद संगीत की दुनिया का बादशाह बन गया, और अपनी शर्तों पर।


गहराई में डूबने के तरीके

🎧 इस आवाज़ में डूब जाइए

📚 कहानी का पीछा कीजिए

🌍 इन जगहों को देखिए

🎸 खुद महसूस कीजिए


🎵 इस गाने को सुनिए

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