SONGFABLE · 1995

They Don't Care About Us

MICHAEL JACKSON · 1995

TL;DR: यह कोई प्रेम गीत या डांस फ्लोर का हिट नहीं है — यह माइकल जैक्सन का सबसे गुस्से भरा, सबसे राजनीतिक गाना है, जो पुलिस की बर्बरता, नस्लवाद और हर उस इंसान के लिए एक चीख है जिसे सत्ता ने "किसी के लायक नहीं" समझकर ठुकरा दिया।
Listen elsewhere

We couldn't link a Spotify track for this story. Try searching the title on song.link to find it on your preferred service.

जब "पॉप का बादशाह" गुस्से में आ गया

ज़रा सोचिए — जिस आदमी ने दुनिया को "Billie Jean" पर मूनवॉक करना सिखाया, जिसने "Thriller" से रातों को नाचने लायक बनाया, उसी ने एक दिन माइक उठाया और प्यार-मोहब्बत के बजाय सीधे सत्ता की आँखों में आँखें डालकर कहा — "वे हमारी परवाह नहीं करते।"

यही "They Don't Care About Us" की सबसे चौंकाने वाली बात है। बहुत से लोग माइकल जैक्सन को सिर्फ़ एक चमकीले, नाचने वाले एंटरटेनर के रूप में याद करते हैं। लेकिन 1995 में, अपने एल्बम HIStory: Past, Present and Future, Book I के साथ, उन्होंने एक बिल्कुल अलग चेहरा दिखाया — एक ऐसा कलाकार जो अपने ही दर्द, अपने ही अपमान और दुनिया भर के दबे-कुचले लोगों के गुस्से को आवाज़ देना चाहता था। यह गाना मनोरंजन के लिए नहीं बना था। यह एक विरोध-गीत है, एक प्रोटेस्ट एंथम, जो भारतीय श्रोता को तुरंत परिचित लगेगा — क्योंकि अन्याय के खिलाफ़ संगीत हमारी अपनी परंपरा का भी हिस्सा रहा है।

जिस दौर में यह गाना जन्मा

1993 से 1995 का समय माइकल जैक्सन के जीवन का सबसे काला अध्याय था। उन पर बाल-शोषण के आरोप लगे थे (जो बाद में अदालत के बाहर सुलझे), मीडिया उनके पीछे शिकारी कुत्तों की तरह पड़ा था, और दुनिया का सबसे मशहूर इंसान अचानक खुद को एक अपराधी की तरह घिरा हुआ महसूस कर रहा था। कहा जाता है कि इसी अनुभव ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया — और उसी क्रोध, उसी अकेलेपन से यह गाना निकला।

लेकिन माइकल ने इसे सिर्फ़ अपनी निजी शिकायत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अपने दर्द को एक बड़े दर्द से जोड़ दिया — गुलामी, नस्लवाद, युद्ध, पुलिस की हिंसा और दुनिया भर के उन करोड़ों लोगों की पीड़ा जिन्हें सिस्टम ने हाशिये पर धकेल दिया है। एक अश्वेत कलाकार के रूप में, जो अमेरिका के सबसे ऊँचे मुकाम पर पहुँचा था, उन्होंने महसूस किया कि कामयाबी भी आपको उस व्यवस्था से नहीं बचा सकती जो आपको कभी "अपना" नहीं मानती।

यहाँ एक दिलचस्प कनेक्शन भारतीय श्रोताओं के लिए है। इस गाने के दो प्रसिद्ध म्यूज़िक वीडियो बने, जिन्हें निर्देशित किया था मशहूर फ़िल्मकार स्पाइक ली ने। इनमें से एक वीडियो ब्राज़ील की झुग्गियों (फ़ावेलाज़) में, साल्वाडोर और रियो डी जनेरो की गलियों में शूट हुआ — गरीब, पर जीवंत समुदायों के बीच, जहाँ ढोल और सामूहिक नृत्य की ऊर्जा हमारी अपनी गलियों के उत्सवों जैसी महसूस होती है। दूसरा वीडियो एक जेल में फ़िल्माया गया, जो कैद और दमन का प्रतीक था। बताया जाता है कि ब्राज़ील के अधिकारियों ने पहले इस शूटिंग का विरोध किया था क्योंकि उन्हें डर था कि यह देश की गरीबी को दुनिया के सामने लाएगा — लेकिन माइकल ठीक यही दिखाना चाहते थे: कि जिन लोगों को सत्ता छिपाना चाहती है, उन्हीं की कहानी सबसे ज़रूरी है।

गाने का असली अर्थ — शब्दों के पीछे की आग

इस गाने के बोल किसी कोमल कविता की तरह नहीं हैं — वे एक खुले घाव की तरह हैं। माइकल इसमें एक ऐसे इंसान की भूमिका में हैं जो हर तरफ़ से पीटा गया है, ठुकराया गया है, और अब चिल्लाकर पूछ रहा है कि उसके साथ ऐसा क्यों हो रहा है।

गाने का केंद्रीय भाव यह है कि एक आम, शक्तिहीन व्यक्ति को बार-बार अपमानित किया जा रहा है — पुलिस द्वारा, सरकार द्वारा, समाज द्वारा। वह खुद को इस्तेमाल की हुई, फेंकी हुई चीज़ की तरह महसूस करता है। वह कहता है कि उसे किसी अपराधी की तरह, किसी जानवर की तरह बर्ताव झेलना पड़ रहा है, जबकि उसका कसूर सिर्फ़ इतना है कि वह वही है जो वह है। बार-बार लौटने वाली पंक्ति — कि "वे" (यानी सत्ता, व्यवस्था, ताक़तवर लोग) "हमारी" परवाह नहीं करते — एक सामूहिक चीख बन जाती है। यह "मैं" से "हम" की ओर बढ़ता है, और यहीं इसकी ताक़त है: यह सिर्फ़ माइकल का दर्द नहीं रह जाता, यह हर पीड़ित का दर्द बन जाता है।

माइकल इसमें सीधे-सीधे व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं — पुलिसिया ज़्यादती पर, झूठे इल्ज़ामों पर, और उस मीडिया पर जो इंसान को इंसान नहीं समझता। यह आक्रोश इतना सच्चा है कि सुनने वाले को बेचैन कर देता है। और यही माइकल का इरादा था — वे चाहते थे कि आप आराम से न बैठ सकें।

(एक बात साफ़ कर दूँ — मैं यहाँ गाने की किसी पंक्ति को हूबहू नहीं दोहरा रहा, बल्कि उसके भाव को अपने शब्दों में बता रहा हूँ, ताकि आप गाने का संदेश समझ सकें।)

एक विवाद जिसने गाने को और गहरा बना दिया

इस गाने के साथ एक बड़ा विवाद भी जुड़ा। रिलीज़ के तुरंत बाद कुछ शब्दों को लेकर आरोप लगा कि वे यहूदी-विरोधी (एंटी-सेमिटिक) हैं। माइकल ने तुरंत माफ़ी माँगी और कहा कि उनका इरादा कभी किसी समुदाय को ठेस पहुँचाने का नहीं था — बल्कि वे तो उस नफ़रत के शिकार की आवाज़ बनकर बोल रहे थे, जो ऐसे अपमानजनक शब्द झेलता है। बाद में उन्होंने उन शब्दों को दोबारा रिकॉर्ड भी किया।

यह विवाद अपने आप में दिलचस्प है, क्योंकि यह दिखाता है कि माइकल कितने जोखिम भरे इलाके में कदम रख रहे थे। एक पॉप स्टार के लिए नफ़रत, नस्ल और हिंसा जैसे मुद्दों पर इतनी सीधी बात करना आसान नहीं था। उन्हें मालूम था कि इससे विवाद होगा, बिक्री पर असर पड़ सकता है, आलोचना होगी — फिर भी उन्होंने यह गाना बनाया। यह एक ऐसे कलाकार की कहानी है जो अपनी कला को सिर्फ़ बेचने की चीज़ नहीं, बल्कि कहने की चीज़ मानता था।

सांस्कृतिक विरासत — एक गाना जो आज भी सड़कों पर गूँजता है

समय के साथ "They Don't Care About Us" सिर्फ़ एक गाना नहीं, बल्कि एक प्रतीक बन गया। दुनिया भर में जब भी अन्याय के खिलाफ़ लोग सड़कों पर उतरे, यह गाना उनके साथ बजा। अमेरिका में "Black Lives Matter" आंदोलन के दौरान, पुलिस हिंसा के खिलाफ़ प्रदर्शनों में, और दुनिया के अनेक हिस्सों में राजनीतिक विरोध के मौकों पर यह गाना बार-बार लौटकर आता रहा है। माइकल के लाखों चाहने वालों ने महसूस किया कि उन्होंने जो 1995 में लिखा था, वह दशकों बाद भी उतना ही प्रासंगिक है।

जिस ढोल-नुमा, मार्चिंग बीट पर यह गाना बना है, वह अपने आप में एक सैन्य परेड या एक विद्रोही जुलूस जैसा महसूस होता है। यह संगीत आपको नचाने के लिए नहीं, बल्कि कदम-से-कदम मिलाकर आगे बढ़ने के लिए उकसाता है। ब्राज़ील के ओलोदुम (Olodum) नामक समूह का ढोल-वादन इस गाने के वीडियो में जोड़ा गया था, और उसी अफ़्रो-ब्राज़ीलियाई ताल ने इसे एक वैश्विक प्रतिरोध की लय दे दी — एक ऐसी धड़कन जो किसी एक देश की नहीं, बल्कि हर दबे-कुचले समुदाय की लगती है।

भारतीय संदर्भ में देखें तो यह गाना हमें अपनी अपनी प्रोटेस्ट-संगीत की परंपरा की याद दिलाता है — चाहे वह आज़ादी की लड़ाई के गीत हों, या समाज के हाशिये पर खड़े लोगों की आवाज़ बनने वाला लोक और जन-संगीत। अन्याय के खिलाफ़ संगीत की भाषा सरहदों को नहीं मानती, और माइकल का यह गाना इसका सबसे बड़ा सबूत है।

यह आज भी क्यों दिल को छूता है

तीस साल बाद भी यह गाना पुराना नहीं लगता — और शायद यही इसकी सबसे दुखद सच्चाई है। जिन समस्याओं की बात माइकल ने की थी — नस्लवाद, पुलिस की ज़्यादती, गरीबों की अनदेखी, ताक़तवर और कमज़ोर के बीच की खाई — वे आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। हर बार जब दुनिया में कहीं कोई अन्याय की घटना सुर्ख़ियों में आती है, यह गाना सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो जाता है।

इसकी ताक़त इसकी ईमानदारी में है। माइकल ने यह गाना दिमाग से नहीं, दिल से बनाया — और उसमें उनका अपना दर्द, अपना अपमान, अपना गुस्सा भरा हुआ है। जब एक ऐसा इंसान जो दुनिया का सबसे मशहूर और सबसे कामयाब कलाकार था, यह कहता है कि "मेरी भी कोई परवाह नहीं करता," तो यह संदेश और भी गहरा हो जाता है: अगर सबसे ऊँचे पायदान पर बैठा इंसान भी खुद को असुरक्षित महसूस करता है, तो आम आदमी की हालत क्या होगी?

यही वजह है कि यह गाना किसी एक दौर का नहीं रहा। यह हर उस इंसान का है जो कभी अनसुना रह गया, हर उस समुदाय का है जिसे "किसी लायक नहीं" समझा गया। और जब तक दुनिया में अन्याय बना रहेगा, माइकल जैक्सन की यह चीख गूँजती रहेगी।


गहराई में डूबने के तरीके

🎧 इस संगीत में डूब जाइए

📚 कहानी को आगे जानिए

🌍 इन जगहों को देखिए

🎸 खुद इसे महसूस कीजिए


🎵 इस गाने को सुनिए

🤖 और पूछिए:

Tags
90s