SONGFABLE · 1957

Summertime

ELLA FITZGERALD & LOUIS ARMSTRONG · 1957 · NEW ORLEANS, USA

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Summertime - Ella Fitzgerald & Louis Armstrong (1957)

TL;DR: सुनने में यह एक नींद की लोरी जैसा शांत गीत लगता है, पर असल में यह 1930 के दशक के अमेरिकी दक्षिण में एक काली माँ का अपने बच्चे से किया गया वादा है — कि एक दिन ज़िंदगी आसान होगी। ख़ूबसूरत धुन के नीचे ग़रीबी, नस्लभेद और उम्मीद की एक गहरी कहानी छिपी है।

जो आपको पहले से पता है, वही ग़लत है

ज़्यादातर लोग "Summertime" को एक मीठी-सी गर्मियों की लोरी समझते हैं। मखमली धुन, धीमी रफ़्तार, और दो दिग्गज आवाज़ें — एला फ़िट्ज़जेराल्ड का रेशमी स्वर और लुई आर्मस्ट्रॉन्ग की वो खुरदरी, मिट्टी से सनी आवाज़। पहली बार सुनकर लगता है कि कोई माँ अपने सोते बच्चे के सिरहाने बैठी गुनगुना रही है। और बात ख़त्म।

लेकिन यहीं पर असली कहानी शुरू होती है। यह लोरी दरअसल एक झूठ है — एक प्यार भरा, ज़रूरी झूठ। गीत में माँ बच्चे से कहती है कि गर्मियाँ हैं, ज़िंदगी आसान है, मछलियाँ उछल रही हैं और कपास के खेत लहलहा रहे हैं, और उसके माँ-बाप अमीर तथा सुंदर हैं। पर जो लोग इस गीत के पीछे की दुनिया जानते हैं, वे समझते हैं कि यह सब हक़ीक़त नहीं — बल्कि वह दुनिया है जो माँ अपने बच्चे को देना चाहती है, मगर दे नहीं पाती। यह एक ऐसी जगह से उठी आवाज़ है जहाँ ज़िंदगी कभी आसान नहीं थी। और यही विरोधाभास इस गीत को इतना गहरा बना देता है।

जॉर्ज गर्शविन, हार्लेम और एक "अमेरिकी ओपेरा" का सपना

"Summertime" मूल रूप से 1935 के ओपेरा Porgy and Bess के लिए लिखा गया था, जिसे अमेरिकी संगीतकार जॉर्ज गर्शविन ने अपने भाई आयरा गर्शविन और लेखक डुबोस हेवर्ड के साथ रचा। कहा जाता है कि गर्शविन का सपना था एक सच्चा "अमेरिकी ओपेरा" बनाना — यूरोप की नक़ल नहीं, बल्कि अमेरिका की अपनी ज़मीन से उठी कहानी। और वह ज़मीन थी दक्षिणी अमेरिका के एक काल्पनिक मोहल्ले "कैटफ़िश रो" की, जहाँ ग़रीब अफ़्रीकी-अमेरिकी समुदाय रहता था।

यह वो दौर था जब अमेरिका में नस्लीय अलगाव क़ानूनी था। काले और गोरे अलग-अलग स्कूलों, बसों और रेस्तराँओं में जाते थे। ऐसे माहौल में गर्शविन ने ज़िद की थी कि Porgy and Bess को सिर्फ़ अश्वेत कलाकार ही गाएँ-निभाएँ — यह उस समय के लिए एक साहसी और राजनीतिक फ़ैसला था। गीत की धुन के बारे में कहा जाता है कि गर्शविन ने इसे अफ़्रीकी-अमेरिकी आध्यात्मिक गीतों (spirituals) और यूक्रेनी लोरियों से प्रेरित होकर गढ़ा — हालाँकि इसके सटीक स्रोत पर आज भी बहस होती है।

भारतीय श्रोताओं के लिए इसमें एक दिलचस्प कड़ी है। जिस तरह हमारे यहाँ शास्त्रीय राग किसी विशेष भाव या समय से बँधे होते हैं — और एक "लोरी" का अपना अलग रस होता है — वैसे ही "Summertime" एक पश्चिमी "लोरी" है जो असल में करुणा और उम्मीद का राग बजाती है। और जैसे हमारे फ़िल्म-संगीत में लता मंगेशकर या मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ें एक गीत को अमर बना देती हैं, वैसे ही 1957 में एला और लुई की जोड़ी ने इस गीत को एक नई आत्मा दी।

1957 में इन दोनों दिग्गजों ने Ella and Louis Again तथा बाद में Porgy and Bess एल्बम के लिए साथ रिकॉर्डिंग की। एला फ़िट्ज़जेराल्ड को "First Lady of Song" कहा जाता था — उनकी आवाज़ इतनी साफ़ और लचीली थी कि वे शब्दों के बजाय सिर्फ़ ध्वनियों से इम्प्रोवाइज़ कर देती थीं (इसे "scat singing" कहते हैं)। दूसरी ओर लुई आर्मस्ट्रॉन्ग — जिन्हें प्यार से "Satchmo" कहा जाता था — न्यू ऑर्लियन्स की ग़रीब बस्तियों से उठकर जैज़ के सबसे बड़े नाम बने। उनकी आवाज़ और ट्रम्पेट दोनों में वही दर्द और ज़िंदादिली थी जो इस गीत को चाहिए थी।

धुन के नीचे छिपा असली अर्थ

गीत की कथावस्तु बेहद सरल लगती है: एक माँ अपने बच्चे को सुला रही है और कह रही है कि चिंता की कोई बात नहीं। वह बताती है कि मौसम गर्मियों का है, इसलिए जीवन सहज है। वह बच्चे को आश्वासन देती है कि उसके आस-पास भरपूरी है और उसके माता-पिता उसकी हिफ़ाज़त करेंगे। वह वादा करती है कि एक दिन यह नन्हा बच्चा बड़ा होगा, अपने पंख फैलाएगा और आसमान को छू लेगा।

लेकिन इसी सादगी में चालाकी है। जिस समुदाय की यह कहानी है, उसके लिए "जीवन आसान" होना एक दूर का सपना था, सच्चाई नहीं। माँ जानती है कि बाहर की दुनिया कठोर है, मगर वह अपने बच्चे को उस कठोरता से बचाना चाहती है। इसलिए वह एक सुरक्षित, भरपूर दुनिया की तस्वीर गढ़ती है — एक ऐसी दुनिया जिसका वादा वह कर तो सकती है पर पूरा नहीं कर सकती। यह झूठ नहीं, बल्कि प्यार की सबसे शुद्ध भाषा है। हर माँ-बाप जानते हैं कि कभी-कभी बच्चे को हक़ीक़त से बचाना ही असली देखभाल है।

जब लुई आर्मस्ट्रॉन्ग यह गाते हैं, तो उनकी थकी, अनुभवी आवाज़ उस माँ-बाप का दर्द जोड़ देती है जिसने ज़िंदगी की मार झेली है। और जब एला गाती हैं, तो उनकी कोमलता उस उम्मीद को ज़िंदा कर देती है जो बच्चे के भविष्य के लिए बची है। दोनों मिलकर एक ही गीत के दो पहलू बन जाते हैं — एक अतीत का बोझ, दूसरा भविष्य की रोशनी।

संस्कृति में जगह और एक विश्व-रिकॉर्ड

"Summertime" को संगीत इतिहास के सबसे ज़्यादा रिकॉर्ड किए गए गीतों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि इसके 25,000 से भी अधिक संस्करण बन चुके हैं — जैज़ से लेकर रॉक, सोल, ब्लूज़, यहाँ तक कि रेगे और पंक तक। बिली हॉलिडे, जैनिस जॉपलिन, सैम कुक, माइल्स डेविस — हर बड़े नाम ने इसे अपने अंदाज़ में गाया या बजाया। यह आँकड़ा ही बताता है कि यह गीत किसी एक शैली का बंदी नहीं रहा; यह सबका हो गया।

रॉक और पॉप पसंद करने वाले भारतीय श्रोताओं के लिए सबसे रोचक बात शायद जैनिस जॉपलिन का 1968 का बेतहाशा भावुक, चीख़ता हुआ साइकेडेलिक रॉक संस्करण है — जो एला और लुई के शांत संस्करण के बिल्कुल उलट खड़ा है। एक ही गीत को दो इतने अलग रूपों में सुनना यह समझाता है कि महान रचना वह होती है जिसे हर पीढ़ी अपने तरीके से दोबारा खोज सके। यह ठीक वैसे ही है जैसे हमारे यहाँ कोई पुराना भजन या ग़ज़ल हर गायक के साथ नया जन्म लेती है।

एला और लुई का 1957 का संस्करण इस पूरे विशाल पेड़ में एक ख़ास टहनी है। यह न तो जैनिस जैसा विद्रोही है, न ओपेरा जैसा भारी — यह बस इंसानी गर्माहट से भरा हुआ है। दो ऐसे कलाकार जो ख़ुद नस्लभेद की मार झेल चुके थे, जब इस गीत को गाते हैं, तो वह केवल एक कला-प्रदर्शन नहीं रह जाता; वह एक जिया हुआ सच बन जाता है।

आज भी यह दिल को क्यों छूता है

लगभग सत्तर साल बाद भी "Summertime" का असर कम नहीं हुआ, और इसकी वजह बहुत सीधी है: हर माँ-बाप अपने बच्चे से बेहतर भविष्य का वादा करना चाहते हैं, भले ही वर्तमान कितना भी कठिन क्यों न हो। यह भावना न अमेरिका तक सीमित है, न 1930 के दशक तक। भारत के किसी भी शहर या गाँव में, कोई भी माँ अपने बच्चे को यही कहती है — "तू बड़ा होकर बहुत आगे जाएगा।" यह उम्मीद वैश्विक है।

दूसरी वजह है इसकी संगीत-शक्ति। धीमी रफ़्तार, साँस लेती हुई धुन और दो विपरीत आवाज़ों का मेल — यह आज के तेज़, शोरगुल भरे संगीत-संसार में और भी क़ीमती लगता है। जब आप थके हों, या रात को सुकून चाहते हों, तो यह गीत आपको एक ऐसी जगह ले जाता है जो भले ही काल्पनिक हो, पर सच्ची लगती है।

और शायद सबसे गहरी बात यह है कि यह गीत हमें सिखाता है कि सुंदरता और दर्द एक साथ रह सकते हैं। यह न तो पूरी तरह उदास है, न पूरी तरह ख़ुश। यह बस ईमानदार है। और शायद इसी ईमानदारी की वजह से, चाहे आप जैज़ के दीवाने हों या रॉक के, यह गीत आपको रुककर सुनने पर मजबूर कर देता है।


गहराई में डूबने के तरीके

🎧 आवाज़ में खो जाइए

📚 कहानी का पीछा कीजिए

🌍 जगहों की सैर कीजिए

🎸 ख़ुद महसूस कीजिए


🎵 इस गीत को सुनिए

🤖 और पूछिए:

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