SONGFABLE · 1985

Summer of '69

BRYAN ADAMS · 1985

TL;DR: यह गाना सिर्फ़ 1969 की गर्मियों की याद नहीं है — ब्रायन एडम्स उस साल केवल नौ साल के थे। यह दरअसल जवानी के उस सुनहरे पल का गीत है जब सब कुछ संभव लगता था, और इसके शीर्षक में छिपा एक शरारती दोहरा अर्थ भी है जिसे एडम्स ने खुद सालों बाद स्वीकार किया।
Listen elsewhere

We couldn't link a Spotify track for this story. Try searching the title on song.link to find it on your preferred service.

वह राज़ जो शीर्षक में छिपा है

ज़रा रुकिए और एक हिसाब लगाइए। ब्रायन एडम्स का जन्म 5 नवंबर 1959 को हुआ था। यानी 1969 की गर्मियों में वे सिर्फ़ नौ साल के थे। नौ साल का बच्चा न तो सस्ता गिटार ख़रीदता है, न बैंड बनाता है, और न ही किसी लड़की के साथ ड्राइव-इन सिनेमा के बाहर खड़े होकर ज़िंदगी के सबसे लंबे वादे करता है। तो फिर यह गाना किस "69 की गर्मी" की बात कर रहा है?

यहीं इस गाने का सबसे मज़ेदार रहस्य खुलता है। एडम्स ने कई इंटरव्यू में — कभी मुस्कुराते हुए, कभी सीधे-सीधे — कहा है कि शीर्षक का साल से कोई लेना-देना नहीं है। यह दरअसल जवानी, प्यार और शारीरिक अंतरंगता की ओर एक शरारती इशारा है। गाने के सह-लेखक जिम वैलेंस (Jim Vallance) इस व्याख्या से पूरी तरह सहमत नहीं रहे — उनका कहना रहा है कि उनके लिए यह वाक़ई 1960 के दशक के अंत की यादों का गीत था। यही दो-धारी कहानी इस गाने को और दिलचस्प बनाती है: एक ही गीत, दो रचयिता, दो बिल्कुल अलग मतलब। और शायद यही वजह है कि यह गाना चालीस साल बाद भी बहस, हँसी और पुरानी यादों — तीनों को एक साथ जगा देता है।

वैंकूवर का वह तहख़ाना जहाँ यह गीत जन्मा

ब्रायन एडम्स कनाडा के किंग्स्टन, ओंटारियो में पैदा हुए। पिता एक राजनयिक थे, इसलिए बचपन इंग्लैंड, इज़राइल, पुर्तगाल और ऑस्ट्रिया जैसे देशों में घूमते हुए बीता। पंद्रह साल की उम्र में उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और संगीत को ही ज़िंदगी बना लिया — कहा जाता है कि अपनी कॉलेज फ़ंड की बचत से उन्होंने एक पियानो ख़रीदा था। वैंकूवर में संघर्ष के दिनों में उनकी मुलाक़ात हुई जिम वैलेंस से, जो पहले Prism बैंड के ड्रमर रह चुके थे। दोनों की जोड़ी ने वैलेंस के घर के तहख़ाने वाले छोटे से स्टूडियो में बैठकर एक के बाद एक हिट गीत लिखे।

"Summer of '69" की रचना भी रिपोर्ट्स के अनुसार जनवरी 1984 में इसी तहख़ाने में शुरू हुई। शुरुआती ड्राफ़्ट का कामचलाऊ शीर्षक कुछ और था, और दोनों लेखक महीनों तक इस पर लौट-लौटकर काम करते रहे। गीत 1984 के अंत में रिलीज़ हुए एल्बम Reckless में शामिल हुआ — वही एल्बम जिसने "Run to You", "Heaven" और "It's Only Love" (टीना टर्नर के साथ) जैसे गाने दिए और एडम्स को रातोंरात विश्व-स्तरीय रॉकस्टार बना दिया। दिलचस्प बात यह है कि जून 1985 में सिंगल के रूप में आया "Summer of '69" अमेरिकी चार्ट पर सिर्फ़ पाँचवें नंबर तक पहुँचा — एल्बम के कुछ दूसरे गानों से नीचे। लेकिन वक़्त ने फ़ैसला पलट दिया: आज Reckless का सबसे अमर गीत यही है।

और यहाँ भारतीय पाठकों के लिए एक ख़ास कनेक्शन है। ब्रायन एडम्स का भारत से रिश्ता किसी भी पश्चिमी रॉकस्टार से ज़्यादा गहरा है। वे 1990 के दशक से लेकर अब तक कई बार भारत में परफ़ॉर्म कर चुके हैं — मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, गुरुग्राम, अहमदाबाद तक। एक पूरी पीढ़ी के लिए — ख़ासकर 90 के दशक में MTV और केबल टीवी के साथ बड़े हुए भारतीयों के लिए — ब्रायन एडम्स पश्चिमी रॉक का पहला दरवाज़ा थे। भारत के कॉलेज फ़ेस्ट में आज भी जब कोई बैंड स्टेज पर चढ़ता है, तो "Summer of '69" लगभग अनिवार्य रस्म की तरह बजता है। यह गीत भारत में इतना घुल-मिल गया है कि कई लोग इसे लगभग "अपना" गाना मानते हैं।

गीत असल में क्या कहता है

अगर शीर्षक की शरारत को किनारे रख दें, तो गीत की कहानी बेहद सीधी और बेहद सच्ची है। एक लड़का याद करता है कि कैसे उसने अपना पहला सस्ता गिटार ख़रीदा था और तब तक बजाया जब तक उँगलियाँ दुखने न लगीं। फिर दोस्तों के साथ एक बैंड बना — जो ज़्यादा चला नहीं, क्योंकि एक दोस्त ने छोड़ दिया और दूसरे की शादी हो गई। ज़िंदगी ने सबको अपनी-अपनी राह पकड़ा दी।

लेकिन इन्हीं बिखरते सपनों के बीच एक लम्हा ऐसा था जो हमेशा के लिए ठहर गया: गर्मियों की वे शामें, पहला प्यार, सिनेमाघर के बाहर हाथ थामे खड़े रहना, और यह यक़ीन कि यह एहसास कभी ख़त्म नहीं होगा। गीत का सबसे मार्मिक मोड़ वही है जहाँ गायक मानता है कि अब, बड़े होकर, जब वह पीछे मुड़कर देखता है, तो सोचता है कि वे दिन क्यों नहीं रुक गए — वे उसकी ज़िंदगी के सबसे अच्छे दिन थे।

ध्यान से देखें तो यह "nostalgia" यानी पुरानी यादों का गीत होते हुए भी आत्म-दया का गीत नहीं है। इसकी धुन उदास नहीं, बल्कि उत्सव जैसी है — तेज़ ड्रम, चमकता गिटार रिफ़, और एडम्स की वह खुरदुरी, ईमानदार आवाज़। यही विरोधाभास इस गीत की आत्मा है: शब्द कहते हैं "वह सब बीत गया", लेकिन संगीत कहता है "पर क्या शानदार था!" बीते हुए को रोने की बजाय जश्न की तरह याद करना — यही "Summer of '69" का असली संदेश है।

और जिम वैलेंस वाली व्याख्या भी अपनी जगह सुंदर है। 1969 अमेरिका और दुनिया के लिए एक प्रतीकात्मक साल था — वुडस्टॉक का संगीत महोत्सव, चाँद पर पहला क़दम, हिप्पी आंदोलन का चरम। उस साल को शीर्षक में रखना पूरे एक युग की जवानी को याद करने जैसा है, भले ही गाने के किरदारों की उम्र का हिसाब न बैठे। शायद इसीलिए यह गीत हर पीढ़ी का हो जाता है — हर किसी की ज़िंदगी में एक "69 की गर्मी" होती है, चाहे वह असल में 1985 हो, 1999 हो या 2015।

स्टेडियम-गान बनने का सफ़र

रिलीज़ के समय "Summer of '69" एक अच्छा-ख़ासा हिट था, पर कोई चार्ट-तोड़ चमत्कार नहीं। असली जादू दशकों में धीरे-धीरे हुआ। 1980 के दशक के अंत तक यह एडम्स के लाइव शो का चरम क्षण बन चुका था। 1990 के दशक में, जब "(Everything I Do) I Do It for You" ने एडम्स को बैलेड-किंग के रूप में दुनिया भर में पहुँचाया, तो पुराने सुनने वालों ने नई पीढ़ी को Reckless की ओर मोड़ा — और "Summer of '69" को दूसरी ज़िंदगी मिल गई।

आज यह गाना उन गिने-चुने गीतों में है जो "स्टेडियम सिंगअलॉन्ग" की श्रेणी में अमर हो चुके हैं — जैसे Queen का "We Will Rock You" या Journey का "Don't Stop Believin'"। शादी की पार्टियों से लेकर स्पोर्ट्स बार तक, करोके नाइट से कॉलेज फ़ेस्ट तक — पहला गिटार रिफ़ बजते ही पूरा कमरा एक सुर में गाने लगता है।

भारत में इसकी विरासत और भी निजी है। 1990 के दशक में जब भारत का बाज़ार खुला और MTV व Channel V घर-घर पहुँचे, ब्रायन एडम्स उन पहले अंतरराष्ट्रीय कलाकारों में थे जिन्होंने भारत में बड़े कॉन्सर्ट किए। उस दौर के स्कूल-कॉलेज के बच्चों ने अपनी पहली गिटार क्लास में जो दो-तीन गाने सीखे, उनमें "Summer of '69" लगभग हमेशा शामिल था — इसके चार सीधे-सादे कॉर्ड इसे हर नौसिखिए गिटारिस्ट का पहला "पूरा गाना" बनाते हैं। आज भी भारत के किसी भी शहर में किसी ओपन माइक या कैफ़े गिग में जाइए — संभावना है कि शाम ख़त्म होने से पहले यह गाना ज़रूर बजेगा। एक तरह से यह गीत भारत के अंग्रेज़ी-रॉक प्रेमियों की साझी जवानी का राष्ट्रगान बन चुका है।

यह भी कहा जाता है कि एडम्स ने जब हाल के वर्षों में भारत के दौरे किए, तो भीड़ की प्रतिक्रिया देखकर वे ख़ुद हैरान रह गए — हज़ारों लोग हर शब्द को याद किए हुए, बिना किसी प्रॉम्प्ट के साथ गाते हुए। एक कनाडाई गायक का चालीस साल पुराना गीत, मुंबई या गुरुग्राम के मैदान में, हज़ारों भारतीय आवाज़ों में — सांस्कृतिक सीमाओं के पार संगीत की ताक़त का इससे अच्छा सबूत क्या होगा?

आज भी यह गीत दिल क्यों छू जाता है

जवाब शायद इस बात में है कि यह गाना किसी ख़ास साल के बारे में है ही नहीं। यह उस सार्वभौमिक अनुभव के बारे में है जो हर इंसान की ज़िंदगी में आता है — वह छोटा-सा दौर जब सपने बड़े थे, ज़िम्मेदारियाँ छोटी थीं, और हर शाम अनंत लगती थी। चाहे आपने वह दौर दिल्ली के किसी कॉलेज हॉस्टल में बिताया हो, पुणे की किसी जैम-रूम में, या शिलांग की बारिश में भीगते हुए — एहसास वही है।

गीत की दूसरी ताक़त इसकी ईमानदारी है। यह कोई परीकथा नहीं सुनाता। बैंड टूट जाता है, दोस्त बिछड़ जाते हैं, प्यार पीछे छूट जाता है — गीत यह सब बिना किसी मेलोड्रामा के, लगभग कंधे उचकाकर स्वीकार कर लेता है। और फिर भी कड़वाहट की एक बूँद नहीं। यह परिपक्वता है: यह मानना कि सबसे अच्छे दिन शायद बीत चुके हैं, और फिर भी मुस्कुराकर उन्हें गाना।

और तीसरी बात — वह शरारती दोहरा अर्थ। यह गाना आपको एक साथ दो स्तरों पर जीने देता है। बच्चों के साथ कार में बजाइए, तो यह जवानी की मासूम यादों का गीत है। दोस्तों के साथ देर रात बजाइए, तो शीर्षक पर एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा लीजिए। बहुत कम गीत इतनी सहजता से मासूमियत और शरारत — दोनों को साध पाते हैं।

आज, जब हम सब अपने फ़ोन की गैलरी में "memories" नोटिफ़िकेशन से अतीत झाँकते हैं, "Summer of '69" का संदेश और भी प्रासंगिक लगता है: पुरानी यादें बोझ नहीं, ईंधन हैं। पीछे मुड़कर देखो, मुस्कुराओ, और गिटार उठाकर आगे बढ़ो। शायद इसीलिए चालीस साल बाद भी, दुनिया के किसी कोने में, इस वक़्त भी कोई नौसिखिया गिटारिस्ट अपनी दुखती उँगलियों से इसी गाने के कॉर्ड बजा रहा है — ठीक वैसे ही जैसे गीत का किरदार बजाता था।


गहराई में डूबने के तरीके

🎧 ध्वनि में डूब जाइए

📚 कहानी का पीछा कीजिए

🌍 जगहों की सैर कीजिए

🎸 ख़ुद अनुभव कीजिए


🎵 यह गाना सुनिए

🤖 [और पूछिए]:

Tags
80s